
आज दिनांक 31/अक्टूबर/2025 को अपना दल एस के जिलाध्यक्ष श्री अंजनी पटेल जी के अध्यक्षता में घोरावल विधानसभा के शाहगंज के गुरुकुल एकेडमी के प्रांगण में भारत रत्न , लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल जी के 150वीं जन्म जयंती बड़े ही धूम धाम से मनाई गई।
इस कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि राष्ट्रीय कार्यकरणीय सदस्य श्री दिनेश बीयार जी विशिष्ट अतिथि गण अध्यक्ष जिला पंचायत सोनभद्र प्रतिनिधि व जिला उपाध्यक्ष श्री अरुण पटेल जी, प्रदेश सचिव युवा मंच श्री आलोक पांडे जी, जिला उपाध्यक्ष श्री विनोद यादव जी उपस्थित रहे।
जयंती कार्यक्रम का सफल संचालन जिला मीडिया सचिव व जिला प्रभारी युवा मंच श्री विकास पटेल जी ने किया।
कार्यक्रम की शुरुआत मुख्यातिथि व विशिष्ट अतिथि गण के साथ जिलाध्यक्ष ने भारत रत्न लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल जी व अपना दल संस्थापक अध्यक्ष यश: कायी डॉ. सोनेलाल पटेल जी के प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर किया।
तदोपरांत शाहगंज तिराहे पर स्थित लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल जी के प्रतिमा पर सभी अतिथियों के साथ सभी अपना दल एस के पार्टी पदाधिकारियों ने माल्यार्पण किया।
इस अवसर पर शीर्ष नेतृत्व के निर्देशन के क्रम में जिलाध्यक्ष सहित अतिथियों ने गैर राजनीतिक व्यक्त श्री लक्ष्मण पटेल जी व श्री कौशल श्रीवास्तव जी को लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल जी की प्रतिमा भेंट सम्मानित किया।
जयंती कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यतिथि जी ने कहा कि, मुख्य अतिथि श्री दिनेश बियार ने कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में एक प्रमुख व्यक्ति थे, जो बाद में भारत के प्रथम उप-प्रधानमंत्री और प्रथम गृह मंत्री बने। उन्हें 565 रियासतों को नव-स्वतंत्र भारत में एकीकृत करने में उनके योगदान के लिए जाना जाता है। भारत के लौह पुरुष के रूप में प्रसिद्ध सरदार पटेल ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम और आधुनिक भारत में कई महत्वपूर्ण योगदान दिए।
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम और आधुनिक भारत में सरदार पटेल का योगदान:
1918 में, वल्लभभाई पटेल ने गुजरात के किसानों का नेतृत्व करने की ज़िम्मेदारी संभाली। उन्होंने खेड़ा सत्याग्रह शुरू किया, जिसमें सूखे के कारण किसानों से राजस्व वसूली रोकने की मांग की गई थी।
एवं विशिष्ट अतिथिगण ने कहा कि, 1920 में, जब कांग्रेस ने असहयोग आंदोलन शुरू किया, तो वल्लभभाई पटेल ने वकालत छोड़ दी। उन्होंने गुजरात विद्यापीठ की स्थापना की, जहाँ बच्चे सरकारी स्कूलों में जाने के बजाय पढ़ाई कर सकते थे।
1928 में उन्होंने बारदोली के ज़मींदारों को ब्रिटिश कर वृद्धि के विरुद्ध सफलतापूर्वक संगठित किया। इसके बाद ही वल्लभभाई को सरदार (नेता) की उपाधि दी गई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष श्री अंजनी पटेल जी ने कहा कि, 1931 में, उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कराची अधिवेशन में अध्यक्ष पद संभाला, जिसने आंदोलन के स्वरूप को एक राजनीतिक संघर्ष से बदलकर उसमें नए सामाजिक-आर्थिक आयाम जोड़ दिए। कांग्रेस के सदस्य के रूप में, वे नो चेंजर्स गुट के सदस्य थे और उन्होंने ग्राम पुनरुत्थान और राष्ट्रवाद के संदेश को जन-जन तक पहुँचाने में रचनात्मक कार्यों की महत्वपूर्ण भूमिका पर ज़ोर दिया।
वह कांग्रेस संसदीय उप-समिति के अध्यक्ष भी थे, जिसका 1935 के अधिनियम के तहत 28 महीने के शासन के दौरान कांग्रेस मंत्रालयों पर पूर्ण नियंत्रण था।
उन्होंने देश की स्वतंत्रता और विभाजन के लिए अंग्रेजों के साथ कष्टदायक वार्ता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
वल्लभभाई पटेल उन पहले कांग्रेसी नेताओं में से एक थे जिन्होंने मुहम्मद अली जिन्ना के नेतृत्व में बढ़ते मुस्लिम अलगाववादी आंदोलन के समाधान के रूप में भारत के विभाजन को स्वीकार किया। वे जिन्ना के प्रत्यक्ष कार्रवाई अभियान, जिसने पूरे भारत में सांप्रदायिक हिंसा भड़का दी थी, और वायसराय द्वारा संवैधानिक आधार पर हिंसा रोकने की उनके गृह विभाग की योजना पर वीटो लगाने से भी नाराज़ थे।
संविधान सभा – पटेल भारत के संविधान निर्माण के लिए गठित संविधान सभा के सदस्य थे। रउन्होंने देश भर के प्रतिष्ठित लोगों को एकत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और अंबेडकर को प्रारूप समिति का सदस्य बनने के लिए राजी भी किया। पटेल अल्पसंख्यकों, आदिवासी और बहिष्कृत क्षेत्रों, मौलिक अधिकारों और प्रांतीय संविधानों से संबंधित समितियों के अध्यक्ष थे।
1947 में जब भारत आज़ाद हुआ, सरदार पटेल उप-प्रधानमंत्री बने। वे गृह मंत्रालय, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और राज्य मंत्रालय के प्रभारी थे। उन्हें 562 रियासतों को संघ में एकीकृत करने का कार्य सौंपा गया था। उन्होंने कुशलतापूर्वक इसे पूरा किया और जूनागढ़ और हैदराबाद में सेना भेजकर उन्हें स्वतंत्र भारत में शामिल होने के लिए मजबूर करने जैसे कड़े कदम उठाए। इन्हीं कड़े कदमों के कारण उन्हें भारत का लौह पुरुष कहा जाता है।
इस अवसर पर जिला सचिव गण श्री रामधनी पटेल श्री श्यामसुंदर पटेल जी, जिला मीडिया सचिव श्री नीरज पटेल जी, जिला कोषाध्यक्ष श्री चंद्रशेखर पटेल जी, जिलाध्यक्ष युवा मंच श्री अंशु तिवारी जी, जिलाध्यक्ष अल्पसंख्यक मंच श्री आशिफ अहमद जी, विधानसभा अध्यक्ष घोरावल श्री रामसूरत पटेल जी, जिला उपाध्यक्ष बौद्धिक मंच श्री चंद्रशेखर पटेल जी, श्री सर्वेश पटेल जी, विधानसभा महासचिव श्री ओमप्रकाश पटेल जी, पूर्व कोषाध्यक्ष श्री लवकुश पटेल, जोन अध्यक्ष गण अयोध्या पटेल, अशोक मौर्या, अन्य सदस्य गण सुरेंद्र पटेल, आनंद विश्वकर्मा, सुशील पटेल, लवकुश पटेल युवा नेता , त्रियोगी सिंह पटेल, सत्यमणि सिंह इत्यादि सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद रहे ।











